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Friday, 17 July 2009

वैष्णव भक्तों में चढ़ा शिव भक्ति का रंग


चित्रकूट। सावन का महीना और चित्रकूट जैसे तीर्थ में बाबा भोले का स्वरूपों के निर्माण के साथ ही पूजन। भले ही इस नगरी की ख्याति वैष्णव हो पर इन दिनों तो पूरी तरह से शिव भक्ति लोगों के सिर चढ़कर उनके शाक्त होने का सबूत दे रही है। ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ ही संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच महारुद्रों के निर्माण का काम करना अपने आपमें विशिष्ठ अनुभव है। तभी तो वीआईपी हो या फिर साधारण लोग यहां पर मूर्तियों को बनाने और उनके पूजन के संवरण लोभ से नहीं बच पाते।
सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये। सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। आशुतोष राणा, राज पाल यादव ने विसर्जन में भी भाग लिया।

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